
रिपोर्ट – अनिल शुक्ला ब्यूरो बस्ती
हल्का लेखपाल ने शासनादेश को ताख पर सोनी वर्मा का जारी किया था आय प्रमाण पत्र
बेनू वर्मा ने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर हल्का लेखपाल के खिलाफ आय प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में जांच कर कार्यवाही करने की है मांग
सोनी वर्मा के आय प्रमाण पत्र की निष्पक्ष जांच की बाद हल्का लेखपाल, सीडीपीओ व जिला कार्यक्रम अधिकारी के भ्रष्टाचार की खुलेगी पोल
बस्ती। बस्ती जिले केनगर पंचायत कप्तानगंज के अन्तर्गत वार्ड नंबर 01 अंबेडकर नगर में आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति में फर्जीवाड़े का आरोप लगा है जिसको लेकर उच्च अधिकारियों से 11 मई 2026 को शिकायत की गई थी लेकिन 20 दिन बीतने के बाद भी आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति के फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच नहीं हो पाई है । जिम्मेदार अधिकारियों के रवैये से परेशान होकर शिकायत कर्ता बेनू वर्मा ने पुनः मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करके उक्त मामले की निष्पक्ष जांच दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग है।
आपको बता दें कि पीड़िता बेनू वर्मा पुत्री विश्वनाथ वर्मा निवासी वार्ड नंबर 01 अंबेडकर नगर,नगर पंचायत कप्तानगंज जिला – बस्ती की मूल निवासिनी है। पीड़िता के वार्ड की निवासिनी सोनी वर्मा पत्नी विनय वर्मा ने हल्का लेखपाल से मिलीभगत करके कूट रचित तरीके से शासनादेश के खिलाफ आय प्रमाण पत्र गरीबी रेखा से नीचे का जारी करवा लिया था जो पूरी तरह गलत है । शासनादेश के खिलाफ जारी गरीबी रेखा से नीचे के आय प्रमाण पत्र के माध्यम से आंगनबाड़ी सहायिका की पद हड़प ली है । अर्थात् बाल विकास परियोजना अधिकारी कप्तानगंज के मिलीभगत से प्रमाण पत्रों का बिना सही ढंग से जांच किए ही सोनी वर्मा का नाम आंगनबाड़ी सहायिका चयनित सूची में प्रथम स्थान पर कर दिया गया है जबकि सोनी वर्मा एक धनी परिवार से सम्बंधित है । सोनी वर्मा के परिवार के सदस्यों की आय प्रतिमाह पचास हजार रुपए से ज्यादा है । ऐसी स्थिति में सोनी वर्मा के दस्तावेजों का सही से जांच करवा कर चयनित आंगनबाड़ी सहायिका की चयनित सूची को निरस्त करते हुए चयन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों एवं चयनित सोनी वर्मा के विरुद्ध कार्यवाही किया जाना आवश्यक एवं न्यायसंगत होगा।
शिकायत कर्ता बेनू वर्मा ने कहा कि उक्त प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सोनी वर्मा के दस्तावेजों की जांच करवा कर उनके विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही करने से प्रदेश सरकार की साफ सुथरी छवि धूमिल होने से बच सकती है ।आंगनवाड़ी सहायिका में प्रयुक्त भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई न होने से भ्रष्टाचारियों का मनोबल बढ़ रहा है और प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का दावा पूरी तरह फेल हो रहा है ।
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