
रिपोर्ट – अनिल शुक्ला ब्यूरो बस्ती
जलभराव के दलदल में विकास! कॉलेज मार्ग बना गंदे पानी का तालाब सफाई व्यवस्था बद हाल नहीं दिख रहा है अधिकारियों को रास्ते का कीचड़।
बस्ती जिले में विकास के नाम पर लूट मची हुई है जिला प्रशासन मामले को संज्ञान में नहीं ले रहा है हर तरफ विकास के नाम पर लूट हो रही है क्या शहर के वार्ड नंबर 4 स्थित पंचपेड़िया कॉलोनी में विकास के दावों की हकीकत सड़क पर भरे गंदे पानी में साफ दिखाई दे रही है। राजन डिग्री कॉलेज को जाने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। सड़क पर जमा गंदा पानी और बजबजाती नालियां स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन गई हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई दिनों से सड़क पर गंदा पानी जमा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की नजर इस ओर नहीं पड़ रही। हालात ऐसे हैं कि लोगों को घरों से निकलने के लिए भी पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में यह जलभराव मच्छरों और संक्रामक बीमारियों को खुला निमंत्रण दे रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं, उसी मार्ग की यह दुर्दशा आखिर किसकी लापरवाही का परिणाम है? क्या विकास सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित रह गया है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि और नेता बड़े-बड़े वादे और विकास के दावे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं जस की तस रह जाती हैं। जलभराव की इस गंभीर समस्या ने एक बार फिर उन दावों की हकीकत सामने ला दी है। लोगों का कहना है कि “वोट के वक्त हर गली याद आती है, लेकिन समस्या के वक्त जनता खुद को अकेला पाती है।”
वार्ड नंबर 4 के सभासद महेंद्र सोनकर और नगर पालिका प्रशासन से स्थानीय लोग शीघ्र समाधान की मांग कर रहे हैं।
जनता पूछ रही है…
क्या यही विकास की तस्वीर है?
क्या छात्रों को शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने के लिए गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ेगा?
आखिर कब जागेगा नगर प्रशासन?
चुनावी वादों का विकास जमीन पर कब दिखाई देगा?
राजन डिग्री कॉलेज के मुख्य मार्ग पर फैला जलभराव प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ-साफ बयां कर रहा है। तस्वीर खुद सवाल पूछ रही है और जवाब का इंतजार कर रही है। जिले में अंधेर नगरी चौपट राजा हो रहा है विकास कागजों में हो रहा है धरातल पर कुछ नहीं दिखाई दे रहा है लेकिन फिर भी जिलाधिकारी महोदय शांत क्यों है।
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