
रिपोर्ट – मोनू खान संवाददाता रायबरेली
रायबरेली | 28 फरवरी, 2026 रायबरेली के कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब शिक्षकों की समस्याओं को लेकर एकजुट हुए दो संगठनों के अध्यक्ष सार्वजनिक रूप से आपस में भिड़ गए। टीईटी (TET) की अनिवार्यता के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान ‘क्रेडिट’ लेने की इस होड़ ने शिक्षकों के अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रैली से शुरू हुआ सफर, टकराव पर हुआ खत्म
हजारों की संख्या में शिक्षक महिला शिक्षक संघ और फेडरेशन ऑफ इंडिया (FI संघ) के बैनर तले विकास भवन से कलेक्ट्रेट तक रैली निकाल रहे थे। शिक्षकों की मुख्य मांग पुरानी नियुक्तियों में टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त करने की थी। लेकिन जैसे ही रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, मांगों की गंभीरता पर आपसी अहंकार भारी पड़ गया।
विवाद की जड़: ‘पहले मैं’ की होड़
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मजिस्ट्रेट फरीद अहमद को ज्ञापन सौंपने के दौरान महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष और एफआई संघ के जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला के बीच पहले ज्ञापन देने को लेकर तीखी बहस शुरू हुई।
तीखी नोकझोंक: देखते ही देखते दोनों गुटों के पदाधिकारी अपनी मर्यादा भूल गए और एक-दूसरे पर चिल्लाने लगे।
मजिस्ट्रेट की कार्रवाई: बीच-बचाव करते हुए मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं को फटकार लगाई और अनुशासन बनाए रखने की सख्त हिदायत दी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘किरकिरी’
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। लोग शिक्षकों के इस आचरण की आलोचना कर रहे हैं। आम चर्चा यह है कि जो गुरु समाज और बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हैं, वे खुद सार्वजनिक मंच पर संयम खो बैठे।

“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षकों की जायज मांगें अब इस आपसी विवाद की छाया में दब गई हैं।” – एक स्थानीय नागरिक
प्रमुख मांगें जिन पर होना था ध्यान
विवादों के बीच शिक्षकों की वास्तविक मांगें निम्नलिखित थीं:
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट प्रदान की जाए।
केंद्र और राज्य सरकार टीईटी संबंधी नियमावली में आवश्यक संशोधन करे।
निष्कर्ष: इस घटना ने टीईटी विरोध की गंभीरता को काफी हद तक कम कर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या ये संगठन अपनी साख बचाकर दोबारा एक
जुट हो पाएंगे।
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