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Jaunpur: संतों ने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य किया : रामशीष।


रिपोर्ट – मनीष यादव संवाददाता जौनपुर

ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन की राष्ट्रीय संगोष्ठी में गोरक्षपीठ की भूमिका पर चर्चा, 22 विभूतियां “समरसता सम्मान” से सम्मानित

जौनपुर:-ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में आयोजित “सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं समरसता सम्मान समारोह रविवार को जिला प्रेक्षागृह, कलेक्ट्रेट-जौनपुर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामशीष ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना होगा। संतों ने सदैव समाज को जोड़ने का कार्य किया है। गोरक्षपीठ की सामाजिक समरसता में बड़ी भूमिका रही है. उन्होंने यह भी कहा कि चार वर्णों से बढ़कर हजारों जातियों में बंटे समाज को फिर से जोड़ने के लिए समयानुकूल नए सूत्र खोजने होंगे। उन्होंने कहा कि भारत में पहले लोग धर्म के माध्यम से एक-दूसरे की रक्षा करते थे। भारत का दर्शन अत्यंत उच्च रहा है, लेकिन उसे षड्यंत्रपूर्वक तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संतों द्वारा दिया गया ‘एक-दूसरे में ईश्वर देखने’ का संदेश कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है, जो चिंता का विषय है। खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि गोरखपुर का गोरक्षपीठ आध्यात्मिक दृष्टि से एक प्रमुख केंद्र है और सनातन धर्म को आगे बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ ने सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया, उसे व्यवहार में भी उतारा है। गोरक्षपीठ के पुजारी दलित समाज से आते हैं, जो सामाजिक समरसता का बड़ा उदाहरण है। विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह ‘प्रिंसू’ ने कहा कि गोरखपीठ ने समय-समय पर सनातन धर्म को मजबूत करने के साथ समाज में समरसता कायम करने का निरंतर कार्य किया है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश की रक्षा के लिए संतों ने शास्त्र के साथ-साथ शस्त्र भी उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का कार्य किया है। उन्होंने लोगों से समाज को तोड़ने वाली शक्तियों का विरोध और जोड़ने वाली चेतना का समर्थन करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

पूर्व सांसद एवं पूर्व एमएलसी विद्यासागर सोनकर ने कहा कि हर कालखंड में समाज ने एकजुट होकर कार्य किया है। भगवान राम और भगवान कृष्ण ने भी सभी वर्गों के लोगों को अपनाया। उन्होंने कहा कि आज लोग सनातन धर्म की मूल भावना को भूलकर केवल परिवार तक सीमित होते जा रहे हैं। सामाजिक समरसता के बिना सनातन धर्म के उद्देश्यों की पूर्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता से ही भारत विश्वगुरु बन सकता है।

गुरु रविदास जन्मस्थान वाराणसी के आचार्य भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ ने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य अग्रिम पंक्ति में रहकर किया है। धर्म की रक्षा तभी संभव है जब समाज के सभी वर्ग एक साथ आएंगे। उन्होंने कहा कि भारत श्रेष्ठ परंपराओं वाला देश होने के बावजूद कई कारणों से पिछड़ रहा है। यदि धर्मग्रंथों की सही व्याख्या की जाए तो समाज की अनेक समस्याओं का समाधान निकल सकता है। उन्होंने समाज और मन में मौजूद भेदभाव को मिटाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ‘तेरे-मेरे’ की भावना से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण करना होगा। बारीनाथ मठ के महंत योगी हरदेवनाथ जी महाराज ने कहा कि समरसता का अर्थ त्याग और अपनत्व है। समाज के छोटे और वंचित वर्गों को गले लगाकर ही सच्ची सामाजिक एकता स्थापित की जा सकती है। विषय प्रवर्तन संगोष्ठी के संयोजक एवं ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह ने किया। वक्ताओं ने सामाजिक समरसता को भारतीय संस्कृति की मूल भावना बताते हुए समाज में सद्भाव और एकात्मता बनाए रखने पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 22 लोगों को “समरसता सम्मान” से सम्मानित किया गया। उपस्थित प्रमुख लोगों में पूर्व विधायक सुरेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. सूर्य प्रकाश सिंह, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह , डॉ. कुंवर शेखर, अमिताभ , विजय गुप्ता, धर्मेंद्र, पंकज त्रिपाठी , सुरेश सिंह, पवन कुमार एवं शिवकुमार चौबे शास्त्री जी उपस्थित रहे।

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