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Basti: सीएमओ का नटवरलाल स्टेनो अनिल चौधरी का कारनामा 15 दिनो तक दबा कर बैठा रहा सीएमओ का जांच आदेश।


30 मार्च को पत्र डिस्पैच होने के बाद जांच आदेश स्टेनों ने किया गायब, सीएमओ के सामने खुला राज

राज खुलते ही स्टेनो अनिल हुआ आगबबूला,

कब होगी इस नटवरलाल व करामाती स्टेनो अनिल चौधरी के विरूद्व कार्यवाही, खडा हुआ बडा सवाल

बस्ती। बस्ती जिले में भ्रष्टाचार चरम पर है और विभाग में लूट मची हुई है ताजा मामला बस्ती जिला चिकित्सालय सीएमओ बस्ती का नटवरलाल व करामाती स्टेनो अनिल चौधरी के काले कारनामे निराले हैं क्योंकि यह विभागीय निर्णय व किसी भी मामले का निर्णय यह स्वंय लेता है जिस पर सीएमओ को हर हाल मे मोहर लगाना उनकी मजबूरी होती है। स्टेनो अनिल चौधरी सीएमओ के सामने जिस प्रकार से बत्तमीजी से बात करता है वह राज्य कर्मचारी नियमावली के विपरीत है। उसके अशोभनीय आचरण के विरूद्ध कार्यवाही करने की हिम्मत सीएमओ डा0 राजीव निगम को नही है। यह सीएमओ को डांटता है, घुडकता है और चेतावनी भी देता है। अब आप समझ सकते हैं कि सीएमओ कार्यालय का इस समय क्या हाल है। सीएमओ डा0 राजीव निगम द्वारा जारी एक पत्र को यह करामाती स्टेनों नियम कानून को ताख पर रखकर 15 दिनों तक दबा कर रखा था। प्रेस के पडताल मे इस मामले का सीएमओ के सामने खुलाशा हुआ। इस प्रकार के गंभीर प्रकरण सामने आने के बाद भी सीएमओ को एक शब्द बोलने की हिम्मत नही हुई। बताया जाता है स्वास्थ्य विभाग मे संचालित नाजायज गतिविधियों को संरक्षण देने का ठेका लेता है और नाजायज काले कारनामों को बढावा देता है। जिसकी चर्चा विभाग के हर किसी के जुबान पर है। बहुत कम समय मे इसके द्वारा अर्जित की गयी अकूत सम्पत्ति ही इसका जीता जागता प्रमाण है।

बताते चलें कि जिले मे विभिन्न स्थानों पर नाजायज तरीके से संचालित नव ज्योंति अल्ट्रासांड सेन्टर जिसका पीसीपीएनडीटी पंजीकरण सांउघाट बज्ञती से है उसका संचालन बभनान गोण्डा मे हो रहा है, दूसरा गौर अल्ट्रासांड सेन्टर गौर जिसका पीसीपीएनडीटी मे चौहदी गौर बाजार का है संचालित सीएचसी का गेट गौर मे हो रहा है। तीसरा लाइफ अल्ट्रासांउड सेन्टर का पंजीकरण कहीं और है संचालित कहीं और हो रहा है। चौथा प्रकरण कृष्णा डायग्नोस्टिक सेन्टर बनकटी का है जो फर्जीवाडे पर संचालित हो रहा है। उपराक्त मामले सीएमओ डा0 राजीव निगम के संज्ञान मे आने के बाद उन्होने 30 मार्च 2026 को पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डा0 ए.के. चौधरी को यह पत्र जारी किया कि वे 7 दिवस के भीतर जांच कर आख्या प्रदान करें। पत्र जारी हो गया और डिस्पैच भी हो गया। उसके बाद वह पत्र गधे की सींग के तरह गायब हो गया। 30 मार्च से 13 अप्रेल तक जारी पत्र नियुक्त किये गये जांच अधिकारी को नही प्राप्त हुआ। जब प्रेस ने इस विलुप्त पत्र की खोज शुरू किया तो मामला परत दर परत खुलता चला गया। हुआ कुछ यूं कि पत्र जारी होने से नाराज सीएमओ के दुलरूआ और नटवरलाल स्टेनो अनिल कुमार चौधरी डिसपैच पर जाकर खुद पत्र ि डिस्पैच किया जिसका डिस्पैच नम्बर 11935 है उसके बाद वह पत्र जांच अधिकारी को न देकर पत्र को दबा लिया। इसका खुलाशा सीएमओ के सामने होते ही नटवरलाल स्टेनो आगबबूला हो गया और सीएमओ के सामने ही अर्मायादित आचरण पर उतर आया। यहां तक कि वह दबांग स्टेनों सीएमओ डा0 राजीव निगम को धमकी देने लगा। अब आप स्वंय समझ सकते हैं कि सीएमओ कार्यालय इस नटवरलाल का किस प्रकार से आतंक फैला हुआ है। सीधे व सज्जन स्वाभाव के अधिकारी और कर्मचारी इसके दबंगई से काफी हैरान और परेशान हैं। नटवरलाल स्टेनो अनिल कुमार चौधरी का निशाना डा0 अशोक कुमार चौधरी पर था। कि पत्र उन्हें मिलेगा नही आख्या सीएमओ को आयेगी नही फिर किरकिरी तो डा0 अशोक कुमार चौधरी की ही होनी थी लेकिन स्टेनो की बदनीयती ने सारे राज का पर्दाफाश कर दिया। बताया तो यहां तक जाता है कि नटवरलाल स्टेनो जिले मे संचालित जायज और नाजायज प्रति अस्पतालों और अल्ट्रासांउड सेन्टरों से प्रतिमाह 5 से 10 हजार तक संरक्षण देने के नाम पर अवैध वसूली करता है। नटवरलाल स्टेनो के कारनामों को हम किस्तों मे आप तक पहुंचाते रहेंगे।

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