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मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने पशुपालन विभाग में दवा व सामग्री की धांधली को लेकर द‍िए थे उच्च स्तरीय जांच के आदेश, 14 द‍िन बाद भी नहीं म‍िली र‍िपोर्ट।


सीएम योगी आद‍ित्‍यनाथ के सख्‍त न‍िर्देशों के बाद भी पशुपालन विभाग में दवा व सामग्री खरीद की दो जांचें अधर में लटकी हुई हैं। मुख्यमंत्री ने 12 जुलाई को एपीसी व अपर मुख्य सचिव कृषि से सात दिन में दोनों मामलों में जांच र‍िपोर्ट मांगी थी।

पशुपालन विभाग में दवा व सामग्री की धांधली को लेकर मुख्‍यमंत्री योगी ने द‍िए थे जांच के आदेश।

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। योगी आद‍ित्‍यनाथ सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में भ्रष्‍टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अफसरों पर बेहद सख्‍त है। इसके बाद भी व‍िभागों में भ्रष्‍टाचार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बेजुबानों की दवा व अन्य सामग्री खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने का आरोप है।

सीएम योगी ने 12 जुलाई को द‍िए थे जांच के आदेश:

पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने दोनों प्रकरण में जिस तरह का पत्राचार किया है, उससे धांधली होने पर किसी को संशय नहीं है। सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, संयोग यह है कि दोनों जांचें अधर में हैं और आरोपित दो अधिकारी अहम पदों पर जमे हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पशुपालन विभाग में दवा व सामग्री की धांधली को गंभीरता से लेकर 12 जुलाई को उच्च स्तरीय जांच कराने के आदेश दिए।

जांच अध‍िकार‍ियों को सात द‍िन में सीएम योगी को देनी थी र‍िपोर्ट: कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार स‍िंह व अपर मुख्य सचिव कृषि व कार्मिक डा. देवेश चतुर्वेदी से सात दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी। जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके पहले पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. रजनीश दुबे ने विशेष सचिव समन्वय रामसहाय यादव को 24 जून को ही इसी मामले की जांच सौंपी थी और एक माह में रिपोर्ट देने का निर्देश था। तय समय पूरा हो चुका है लेकिन, जांच रिपोर्ट पर पशुपालन विभाग के अफसर सिर्फ यही कह रहे हैं कि रिपोर्ट अभी नहीं मिली।

धांधली को लेकर सीएम योगी ने द‍िए थे जांच के आदेश:

पशुपालन विभाग भी उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट की राह देख रहा है। उधर, इस धांधली में आरोपित डा. इंद्रमणि इन दिनों निदेशक पशुपालन हैं, वहीं डा. आरपी स‍िंंह यूपी डास्प पिकप भवन में समन्वयक के पद पर जमे हैं। दोनों अधिकारी निदेशक रोग नियंत्रण रह चुके हैं। डा. स‍िंह को तो सेवानिवृत्त होने के बाद अहम पद दिया गया। कृषि उत्पादन आयुक्त स‍िंह का कहना है कि ग्राम्य विकास व पंचायतीराज के कार्यों में व्यस्तता से जांच रिपोर्ट तैयार नहीं कर सके, जल्द ही शासन को सौंप देंगे।

इस तरह खरीद में हुआ भ्रष्टाचार

  • 2021-22 में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) योजना के तहत सामग्रियों की खरीद में धांधली हुई हैं।
  • विभाग ने एक्टिव कोल्ड बाक्सेस 1,27,770 रुपये प्रति नग की दर से खरीदा।
  • मध्य प्रदेश के पशुपालन विभाग ने इन्हीं बाक्सेस को 47,250 व 49,500 रुपये में खरीदा, जबकि जम्मू-कश्मीर में 59,000 प्रति नग की दर से खरीदा गया।.
  • ऐसे ही जम्मू-कश्मीर व उत्तराखंड की दवा आपूर्ति करने वाली कंपनियां कटघरे में हैं, क्योंकि राजकीय विश्लेषक उत्तर प्रदेश ने जांच में इन्हें अधोमानक यानी घटिया पाया है।
  • बता दें क‍ि पशुपालन विभाग का रोग नियंत्रण व प्रक्षेत्र महकमा पशुओं का इलाज करता है। पशुओं में होने वाली बीमारियों किलनी, चपटी, पेट में कीड़े आदि से संबंधित दवाएं अलग-अलग कंपनियों से करोड़ों रुपये की दवा खरीदी गई थीं। विभाग ने खरीदी गई दवाओं का सैंपल भेजकर राजकीय विश्लेषक उत्तर प्रदेश से जांच कराई थी।

    जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि दवाएं अधोमानक यानी घटिया हैं। निदेशक रोग नियंत्रण व प्रक्षेत्र डा. जीवन दत्त ने मेसर्स मिलिन लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड इंड्रस्ट्रियल स्टेट जम्मू को स्पष्टीकरण मांगा था। कंपनी की ओर से दिए गए जवाब को भी तथ्यहीन व साक्ष्यहीन माना गया था। निदेशक ने इस कंपनी को दो वर्ष के लिए पशुपालन विभाग से व्यापार करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। निदेशक ने यह भी लिखा था कि यदि इस कंपनी की कोई और दवा घटिया पाई गई तो फर्म पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। साथ ही घटिया मिली दवा की आपूर्ति में जो धनराशि ली गई है उसे वापस लौटाने के निर्देश दिए थे, अन्यथा भू-राजस्व की तरह वसूली करने का भी अल्टीमेटम दिया था।

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