
रिपोर्ट- प्राची श्रीवास्तव संवाददाता लखनऊ
शिक्षक बदलेंगे तो शिक्षा बदलेगी और शिक्षा बदलेगी तो भारत बदलेगा : डॉ. एस. पी. सिंह
शिक्षक केवल भविष्य नहीं बनाते, वे राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं : डॉ. एस. पी. सिंह

शिक्षक दिवस के अवसर पर लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज की ओर से लखनऊ पब्लिक कॉलेज, गोमती नगर स्थित श्री रामलाल मेमोरियल ऑडिटोरियम में भव्य शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में संस्थान की विभिन्न शाखाओं से आए प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान, समर्पण एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए करीब 50 लाख’ रुपए के आकर्षक पुरस्कारों, कलाई घड़ियां, बोरोसिल के डिजाइनर बाउल सेट, बोरोसिल मग- प्लेट- सेट , इलेक्ट्रिक इंडक्शन , बोरोसिल लंच बॉक्स, इलेक्ट्रिक केसरोल, बोरोसिल टिफिन एवं बोतल, शाल व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कन्नौज सांसद अखिलेश यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज के संस्थापक एवं चेयरमैन सांसद डॉ. एस. पी. सिंह ने अखिलेश यादव को शॉल एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया।


समारोह में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा अनेक आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। संगीत, नृत्य एवं अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न शाखाओं से आए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
मुख्य अतिथि अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश में विद्यालयों के बंद होने की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालयों के बंद होने से विशेष रूप से गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा प्राप्त करना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के हर वर्ग तक पहुंचनी चाहिए और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अवसर मिलना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा को समाज और राष्ट्र के विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज के संस्थापक एवं चेयरमैन सांसद डॉ. एस. पी. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है। आज शिक्षक को विद्यार्थियों में सोचने, प्रश्न करने, तर्क करने, समस्याओं का समाधान खोजने और नई परिस्थितियों के अनुरूप सीखने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि “शिक्षक बदलेंगे तो शिक्षा बदलेगी और शिक्षा बदलेगी तो भारत बदलेगा।”

उन्होंने कहा कि शिक्षा का केंद्र “बच्चा” होना चाहिए। शिक्षक को यह देखने के बजाय कि उसने कक्षा में कितना पढ़ाया, यह देखना चाहिए कि बच्चे ने कितना सीखा, कितना समझा, कितना प्रश्न किया और अपने ज्ञान को व्यवहार में कितना उतारा। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थी-केंद्रित एवं अनुभव आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता अलग होती है और शिक्षक का दायित्व है कि वह हर विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारे। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करें; केवल नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि नए अवसर पैदा करने के योग्य बनाएं।
समारोह में एम.डी. सुशील कुमार, मुख्य प्रशासिका कान्ति सिंह (पूर्व एम.एल.सी.), जनरल मैनेजर्स हर्षित सिंह एवं शिखर पाल सिंह, डायरेक्टर्स नेहा सिंह, गरिमा सिंह एवं निकिता सिंह सहित विभिन्न शाखाओं के प्रधानाचार्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। शिक्षक दिवस का यह आयोजन शिक्षा, संस्कार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की सर्वोच्च भूमिका का संदेश देता हुआ यादगार बन गया।
LIvetvexpress.in.net Online News Portal