
सुलतानपुर। जनपद के बेलहरी सादात में 5 रवि-उल-अव्वल को पारंपरिक अक़ीदत और बेहद गमगीन माहौल में ‘जुलूस-ए-अज़ा’ (उजड़ा हुआ करबला) का आयोजन किया गया। इस मौके पर कर्बला के शहीदों की याद और उनके बलिदान का तजकिरा (जिक्र) सुनकर उपस्थित छोटे, बड़े, बुजुर्ग, पुरुष और महिलाओं की आँखों से आँसू छलक पड़े। हर तरफ ‘या हुसैन अलविदा’ की सदाएँ गूंजती रहीं।
निज़ामत और नक़ाबत ने दिलों को झकझोरा
मजलिस और जुलूस के दौरान निज़ामत के फ़राएज़ जीशान आलम साहब ने अंजाम दिए, जबकि नक़ाबत मौलाना फरहान अली साहब ने की। मौलाना साहब ने जब कर्बला के मज़लूमों की दास्तान बयां की, तो वहाँ मौजूद हर शख़्स की आँखें नम हो गईं और पूरा माहौल सोगवार हो गया।अंजुमनों ने पेश किया नौहा व मातमजुलूस में सुलतानपुर और आस-पास के क्षेत्रों से आई कई नामचीन अंजुमनों ने शिरकत की और नौहाख्वानी व मातम कर इमाम हुसैन को खिराजे-अकीदत पेश किया।

इसमें मुख्य रूप से शामिल अंजुमनें रहीं:
अंजुमन रिज़विया (हसनपुर, सुलतानपुर)अंजुमन असग़रीया (हयातनगर, सुलतानपुर)अंजुमन जाफरिया (कोटवा, सुलतानपुर)अंजुमन हुसैनिया (मुंगर, सुलतानपुर)अंजुमन परचम-ए-अब्बासअंजुमन लश्कर-ए-हुसैनी (बरुआ)अंजुमन मज़लूम-ए-हुसैनी (छतौना, सुलतानपुर)अंजुमन अज़ा-ए-हुसैनी (सुरौली, सुलतानपुर)
मरहूमीन की याद में लगाई गई सबीलअज़ादारों की सहूलियत के लिए जुलूस के रास्ते में पानी और शर्बत की सबीलें लगाई गईं।
यह सबीलें मरहूम मुश्ताक़ हुसैन जी, मरहूम अख़्तर हुसैन नन्हे जी, मरहूम इरशाद हुसैन जी, मरहूम गुलाम हुसैन जी, मरहूम सज्जाद हुसैन जी, मरहूम हैदर जाफरी जी, मरहूमा वरा फ़ातिमा बिन्ते सज्जाद और मरहूमा खुशबू की याद में (ईसाले-सवाब हेतु) लगाई गई थीं।हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसालयह जुलूस आपसी सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब का गवाह बना। ‘शियाने हैदर-ए-कर्रार वेलफेयर एसोसिएशन’ के संस्थापक हसनैन जाफरी ‘डम्पी’ ने इस मौके पर कहा कि बेलहरी सादात का यह क्षेत्र हमेशा से आपसी एकता की मिसाल रहा है। यहाँ सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के मजहब और भावनाओं का सम्मान करते हैं और हर मोड़ पर कंधे से कंधा मिलाकर साथ देते हैं।इन्होंने निभाया मुख्य दायित्व’

अंजुमन सिपाहे अब्बासिया मोहम्मदिया बेलहरी सादात’ के तत्वावधान में आयोजित इस जुलूस को कामयाब बनाने में क्षेत्र के जिम्मेदार लोगों ने दिन-रात एक कर दिया।

इनमें मुख्य रूप से राहिल जी, आबिस जी, मेहंदी जी, कुमैल जाफ़री जी, आरजू जी, अफ़सर जी, फिरोज़ जाफरी, मोहम्मद अब्बास, सन्नन जाफरी जी, जनाब बब्लू रिज़वी भानौली, जनाब कामिल रज़ा भनोली, जनाब साहिल रज़ा भनोली,जनाब मज़हर हुसैन जाफरी, जनाब जकी हैदर जाफरी, जनाब बॉबी आब्दी जी और जनाब मोहम्मद हाशिम कलहु शामिल रहे। इन सभी लोगों के आपसी तालमेल और कड़े परिश्रम की बदौलत यह जुलूस-ए-अज़ा शांतिपूर्ण और बेहद गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ।
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